मस्तराम के सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार!
आज मैं महीनों नहीं, सालों बाद मस्तराम पर कुछ लिख रहा हूँ.
आज तक मैंने जो भी लिखा वो लगभग मेरी कल्पना ही थी जिसे मैं अपने हिसाब से लिखता चला गया। लेकिन आज जिसके बारे में लिख रहा हूँ वो कल्पना होते हुए भी हकीकत है।

मस्तराम की वजह से मुझे मिला यह एक हसीं तोहफा! एक नायाब श्रेष्ठ हिंदी कथाकार से परिचय, मेल का आदान-प्रदान, फिर फोन पर बातें- सब कुछ होता चला गया।
श्याम एक अनुभवी और बहुत उच्च कोटि का उत्तेज़क साहित्य लिखने वाले हैं। वे लीलाधर के नाम से लिखते हैं और मस्तराम पर उनकी कई विलक्षण कहानियाँ उपलब्ध हैं, जैसे-
स्वीटी या जूली
केले का भोज
शालू की गुदाई
लाजो का उद्धार
विदुषी की विनिमय लीला
जेम्स की कल्पना
वगैरह।
मैं ऐसे दुर्लभ व्यक्ति के उनके संपर्क में बना रहना चाहता था, और रहा भी।

एक बात हम दोनों में समान थी- और वो ये कि हमारी कहानियों की नायिका अक्सर हमारी पत्नी हुआ करती थी। उन्हें हम किसी गैर मर्द से संभोग करते देखने की चाहत रखते थे। इसलिए हम एक-दूसरे से अपनी अपनी पत्नियों का नग्न और कामुक वर्णन करने में संकोच नहीं करते थे।
मैंने इस थीम पर
मेरी बेबाक बीवी
और
मेरी बेकाबू बीवी
शीर्षक सीरीज की कहानियाँ भी लिखी जिसे मस्तराम के पाठकों ने पढ़ा होगा।

लेकिन हम दोनों में एक बड़ा अंतर भी था- श्याम की पत्नी उनकी बिल्कुल दोस्त जैसी थी, उनकी कहानियाँ पहले वही पढ़ती थी और पास करती थी, जबकि मेरी स्थिति इसके एकदम विपरीत थी। जैसा कि ज्यादातर लोगों के साथ होता है, मैं अकेले अकेले ही सारे यौन ख्वाब देखने को मजबूर था।
इसलिए मेरी लिखी बातें जहाँ कोरी कल्पना होती थीं, श्याम की कल्पना एकदम हकीकत। उन्होंने एक पर पुरुष ‘जेम्स’ के साथ कल्पना के सम्भोग के बारे में एक कहानी ही लिख डाली थी- जेम्स की कल्पना
वह कहानी उनकी सच्ची घटना थी जिसे पढ़ कर मैं महीनों उत्तेजित रहा, बड़ी तीव्रता से कल्पना के साथ सम्भोग के रंगीन ख्वाब देखने लगा था।

कल्पना का दीवाना तो मैं तभी से हो गया था जब मैंने लीलाधर की कहानी ‘शालू की गुदाई’ पढ़ी थी। उस कहानी में उन्होंने उसकी चूत में गुदना गुदवाने का और क्लिटोरिस में रिंग पहनाने का ऐसा समाँ बांधा था कि मैं उसके बारे में उत्सुकता से भर गया था और उसके साथ सबकुछ करने के सपने देखने लगा था। लेकिन वे सपने कभी हकीकत में बदल जाएंगे ऐसा तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।