मेरी पिछली पारिवारिक चुदाई की कहानी
मौसी की चुदाई :
में आपने पढ़ा कि उत्तेजनावश किस तरह रोहित ने मेरी जांघों को चोद कर अपने लण्ड को शांत किया।

अब आगे:

कुछ देर बाद जब डोरबेल बजी तो मेरी नींद खुल गयी. समय देखा तो पांच बजने को थे और ये समय अन्नू के स्कूल से लौटने का था। मैंने उठकर वापस से वही गाउन पहन लिया और दरवाज़ा खोलकर अपनी बेटी को अपनी बांहों में लेकर अंदर आयी।

अन्नू के रूम में जाने के बाद मैंने सबके लिए चाय बनाई और फिर हम सबने खूब बातें की.

कुछ देर बाद अन्नू और रोहित टीवी देखने हॉल में चले गए और कमरे में मैं और रोहन ही थे।

मुझे इस विषय में बात करने के लिए इससे बेहतर समय नहीं मिल सकता था। मैंने रोहन से अपने मन की बात बता दी, कहा- मैं वाकयी देखना चाहती हूं कि तुम दोनों क्या करते हो।
रोहन मेरी बात सुनकर बोला- मम्मी हम दोनों एक दूसरे को दोस्त से भी बढ़कर मानते हैं. और आज रात मैं आपको हम दोनों के बीच क्या होता है, वो सब कुछ दिखाऊँगा और सुनाऊँगा भी।

मैंने कहा- कैसे?
रोहन ने कहा- वो आप मुझ पर छोड़ दो. पापा साढ़े ग्यारह बजे तक सो जाते हैं. मैं आपको उसके बाद वीडियो कॉल करूँगा. आप बस कॉल पिक कर लेना और सब कुछ देखना और सुनना।

रोहन मेरे सामने ही उठा और अपने बैग से टेबलेट निकाला. और उसे उसने अपने बिस्तर के पीछे लगी हुई कांच की अलमारी में किताबों के बीच रख दिया.
फिर मुझसे कहा- मम्मी, यहाँ से आपको सब दिखाई भी देगा और सुनाई भी देगा।

मैंने रोहन की समझदारी की दाद देते हुए शाबाशी दी और फिर उठकर घर के काम करने लगी।

रात होने को आई तो रवि भी आफिस से वापस आ गए और फिर मैं रात के खाने की तैयारियाँ करने लगी।